मुस्लिम पॉलिटिकल इत्तेहाद मसौदा।
मुस्लिम पॉलिटिकल इत्तेहाद मसौदा 📜🤝, मुस्लिम लीडरों और रहबरों के नाम 📣
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर्रहीम 🤲🕌
कश्मीर 🏔️ से कन्याकुमारी 🌊 तक सभी मुस्लिम कयादत वाली पार्टियों के दरवाज़े 🚪 पर जाकर 2012 से उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के हाथ 🤝 में यह मसौदा दिया गया है।
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असादुद्दीन ओवेसी साहेब 👤, (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन 🤝),
मौलाना बदरुद्दीन अजमल साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट 🤝),
क़ादिर मोहिउद्दीन साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 🤝),
ए. सईद साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया 🤝),
डॉ सय्यद क़ासिम रसूल इल्यास साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया 🤝),
डॉ. मोहम्मद अय्यूब साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ पीस पार्टी ☮️),
मौलाना आमिर रसादि साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल 🤝),
प्रो. मुहम्मद सुलेमान साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ इंडियन नेशनल लीग 🤝),
शमशेर खान पठान साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ आवामी विकास पार्टी 📈),
जनाब फारूक अब्दुल्ला 👤 (पूर्व मुख्यमंत्री 🏛️, राष्ट्रीय अध्यक्ष नेशनल कांफ्रेंस 🤝),
मोहतरमा मेहबूबा मुफ़्ती सईद साहिबा 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी 🤝),
जनाब सलीम पीरजादा साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ परचम पार्टी ऑफ़ इंडिया 🚩),
हज़रत मौलाना तौक़ीर रज़ा साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल 🤝),
एडवोकेट वसी अहमद साहेब 👤 (राष्ट्रीय अध्यक्ष 🏛️ आल इंडिया मुस्लिम मजलिस 🤝)
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मुस्लिम लीडरशिप 👥 की पार्टियों में एक मजबूत गठबंधन 🤝 की ज़रूरत है, इसलिए मुस्लिम लीडरों 🧑💼 और रहबरों 🕌 को इस्माईल बाटलीवाला का अहम सुझाव 💡📜
(1) भारत 🇮🇳 देश में सिंगल लीडरशिप 👤 का माहौल नहीं है बल्कि सामूहिक लीडरशिप 👥🤝 का माहौल है। देश बहुत बड़ा 🌍 है, इसलिए कोई एक लीडर 👤 पूरे देश के लिए काफी नहीं हो सकता ❌। सामूहिक लीडरशिप खड़ा करना मुश्किल काम ⚙️ है, मेहनत 💪 और सब्र ⏳ मांगता है, मगर सिंगल लीडरशिप खड़ा करना लगभग नामुमकिन 🚫 है। इसलिए बेहतर यही है कि मिलकर 🤝 एक टीम 👥 बनाई जाए जो मिलकर फैसले ले और क़ौम की रहनुमाई करे 🧭।
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(2) भारत 🇮🇳 देश में आज राजनीतिक गठबंधन 🤝 का दौर चल रहा है। लगभग सभी बड़ी और छोटी पार्टियां 🏛️ किसी ना किसी गठबंधन का हिस्सा हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रही हैं 🤝📊। ऐसे माहौल में मुस्लिम पार्टियों 🕌 को भी चाहिए कि वे आपस में मतभेद भुलाकर 🤲 एक साझा प्लेटफॉर्म बनाएँ और गठबंधन करने की कोशिश करें 🤝, ताकि उनकी सियासी ताकत 📈 बढ़ सके और बेहतर नतीजे हासिल हो सकें 🎯।
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(3) जिस तरह N.D.A ⚖️ और I.N.D.I.A ⚖️ जैसे बड़े गठबंधन देश की राजनीति में सक्रिय हैं, उसी तरह मुस्लिम लीडरशिप 👥 के अंदर भी एक मजबूत गठबंधन 🤝 की ज़रूरत है। इसका मतलब है कि एक ऐसा मोर्चा 🏴 बनाया जाए जिसका गठन 🏗️ संगठित तरीके से हो और जिसकी अगुवाई मुस्लिम लीडरशिप 🧑💼🤝 करे, ताकि एकजुट होकर सियासी मैदान 🗳️ में प्रभावी भूमिका निभाई जा सके और क़ौम की आवाज़ 📣 बुलंद की जा सके।
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(4) इत्तेहाद 🤝 मोहीम का मक़सद यह नहीं है ❌ कि सभी लोगों की सोच 💭 एक जैसी हो जाये, बल्कि कारखानों 🏭 जैसा इत्तेहाद कायम करना ही इस मोहीम का असली मकसद 🎯 है।
जैसे कि एक कारखाने 🏭 में कई पार्टनर 👥 होते हैं, मगर सबकी सोच 💭 अलग-अलग होती है, सबका खाना-पीना 🍽️ अलग होता है, कारखाने में सबकी पूँजी 💰 अलग-अलग लगी होती है, और हर एक को उसका हिस्सा 📊 भी अलग-अलग मिलता है।
सबका काम करने का समय ⏰ अलग-अलग होता है, सबकी कार्य क्षेत्र 📍 अलग-अलग होते हैं, और जिम्मेदारियां ⚙️ भी अलग-अलग बंटी होती हैं। कुछ लोगों के धर्म 🕌⛪🛕 और विचारधारा 📖 भी अलग होती है, और कुछ लोगों की भाषा 🗣️, बोली और संस्कृति 🎭 भी अलग-अलग होती है।
लेकिन इन सब फर्कों ⚖️ के बावजूद एक बात पर सबका इत्तेफाक 👍 जरूर होता है — कि कारखाना 🏭 चलना चाहिए।
इसी वजह से, कम से कम कारखाना चलने तक ⏳, उनमें आपसी इत्तेहाद 🤝 बना रहता है। तभी कारखाना सही तरीके से चलता है ⚙️ और सभी को उनका-अपना हिस्सा 📈 मिलता रहता है।
और जिस कारखाने 🏭 में इत्तेहाद खत्म ❌ हो जाता है, वह कारखाना बर्बाद 💥 हो जाता है, और उसके साथ सभी पार्टनरों का नुकसान 📉 हो जाता है।
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(5) मुस्लमानों ☪️ ने सेक्युलरिज्म 🏳️ के नाम पर 1947 🇮🇳 से 1975 तक बिना शर्त 🤝 कांग्रेस 🏛️ का साथ दिया।
1977 में जय प्रकाश नारायण की लीडरशिप 👤 में जनता पार्टी 🏛️ बनी, जिसमें RSS की सारी तंज़ीमें शामिल थीं, और मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 जनता पार्टी 🏛️ का साथ दिया।
1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की लीडरशिप 👤 में जनता दल 🏛️ और BJP के साथ समझौता 🤝 हुआ, और मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त जनता दल 🏛️ और BJP 🪔 का साथ दिया।
पश्चिम बंगाल 📍 में C.P.M. ☭ और C.P.I. ☭ को मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 समर्थन दिया।
आंध्र प्रदेश 📍 में तेलगुदेशम पार्टी 🏛️ को मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 साथ दिया।
उत्तर प्रदेश 📍 में मायावती और मुलायम सिंह को मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 साथ दिया।
बिहार 📍 में लालू प्रसाद और नितीश कुमार को मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 साथ दिया।
आसाम 📍 में कांग्रेस 🏛️ और आसाम गणपरिषद 🏛️ को मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 साथ दिया।
तमिल नाडु 📍 में जयललिता और करुणानिधि को मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 साथ दिया।
कर्नाटक 📍 में कांग्रेस 🏛️ और देवेगौड़ा को मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 साथ दिया।
मध्य प्रदेश 📍, राजस्थान 📍, गुजरात 📍, महाराष्ट्र 📍 में भी कांग्रेस 🏛️ को मुस्लमानों ☪️ ने बिना शर्त 🤝 समर्थन दिया।
मगर इन सभी पार्टियों 🏛️ ने मुस्लमानों ☪️ को सिर्फ वोट बैंक 🗳️ से ज्यादा कुछ नहीं समझा ❌, और मुस्लमानों के पिछड़ने 📉 के ज़िम्मेदार ये सभी पार्टियाँ रही हैं।
कोई मुस्लमानों को मुर्ख 🤦 बनाकर वोट चाहता है,
कोई कानून ⚖️ का डर दिखाकर वोट चाहता है,
और कोई दंगा-फसाद 🔥 का डर दिखाकर वोट हासिल करना चाहता है 😟।
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(6) हमारे पुरखों 👴 ने गोरे फिरंगियों 🇬🇧 से आज़ादी 🇮🇳 हासिल की थी ✊, मगर यह आज़ादी हाईजैक 🚨 होकर काले फिरंगियों 🕴️ के हाथों में चली गयी 😔। अब ज़रूरत है कि उसे फिर से हासिल किया जाए 🔄✊।
क्योंकि काले फिरंगियों 🕴️ का पोलीटिकल सिस्टम ⚙️ ऐसा है कि पहले चोरी 💰 सिखाता है, फिर चोर 🕵️♂️ को पकड़ने के लिए क़ानून ⚖️ बनाता है, फिर उसी चोर को बचाने के लिए रिश्वत 💵 लेता है।
इसके बाद हालात ऐसे बन जाते हैं कि चोर 🕵️♂️ और सिपाही 🚔 दोनों साथ-साथ 🤝 रहने लगते हैं, और मिलकर देश में भ्रष्टाचार 📉💰 को बढ़ावा देते हैं, जिससे पूरा सिस्टम अंदर से खोखला हो जाता है ⚠️।
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(7) काले फिरंगियों 🕴️ का पोलीटिकल सिस्टम ⚙️ की वजह से देश 🇮🇳 भर में हैवानियत 😡 और दरिन्दगी 🐺 का माहौल बढ़ता जा रहा है 📈।
इनके जाल 🕸️ में फंसकर लोग 👥 एक-दूसरे के खिलाफ दरिन्दगी 🐺 और दुश्मनी ⚔️ अपनाते जा रहे हैं 😔।
और यही काला पोलीटिकल सिस्टम ⚙️ देश 🇮🇳 को गृहयुद्ध ⚔️, धर्मयुद्ध 🛕🕌✝️ और बटवारे ✂️ की तरफ धकेल रहा है 🚨,
और इसकी ज़िम्मेदारी ⚠️ मुसलमानों ☪️ पर डालने की कोशिश की जा रही है ❌😟।
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(8) कांग्रेस 🏛️, बीजेपी 🪔 और कम्यूनिस्ट ☭ — ये तीनों पॉलिटिकल पार्टियां 🏛️ 2% काले फिरंगियों 🕴️ के हाथों में हैं 🤲।
इसी वजह से देश 🇮🇳 की राजनीति 📉 का दिवाला निकल चुका है ⚠️, और आज तक कई बार पार्टी 🏛️ बदली, नेता 👤 बदले, झंडा 🚩 बदला,
मगर काले फिरंगियों 🕴️ का पोलीटिकल सिस्टम ⚙️ ही कायम रहा है ❗
इसी कारण देश 🇮🇳 में कोई असली बदलाव 🔄 नहीं हो पा रहा है 🚫😔।
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(11) महात्मा बुद्ध 🧘 के विचार 💭, श्री कृष्ण 🪈 के विचार 💭, श्री राम 🏹 के आदर्श ✨, महावीर 🕊️ के विचार 💭, गुरु नानक 🙏 के विचार 💭, हजरत ईसा ✝️ के विचार 💭, और हजरत मोहम्मद ﷺ ☪️ के विचार 💭 — ये सभी हमारे देश 🇮🇳 की अमूल्य पूंजी 💎 हैं।
मगर काले फिरंगियों 🕴️ का पोलीटिकल सिस्टम ⚙️ इन महान विचारों 💭 को बदनाम 😔 और बर्बाद 💥 करने में लगा हुआ है।
इसलिए ज़रूरत है कि देश 🇮🇳 के सभी धर्मों 🛕🕌⛪🙏 का आदर 🤝 करते हुए, संविधान 📜 के दायरे में रहते हुए और कानून ⚖️ का पालन करते हुए,
एक स्वदेशी सियासी सिस्टम 🏛️⚙️ देश के सामने लाया जाए 🎯, जो अभी तक इस देश में सही मायनों में लागू नहीं हो पाया है
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(12) इत्तेहाद 🤝 के कारण भारत 🇮🇳 के 2% काले फिरंगियों 🕴️ की हिकमत अमली 🎯 सफल हो जाती है 📈 और वो हुकूमत 🏛️ में बने रहते हैं,
जबकि मुस्लिम ☪️, दलित 🤝, हिन्दू OBC 👥 और आदिवासी 🌿 — इनका इन्तेशार ❌ (बिखराव) होने की वजह से उनकी हिकमत अमली 🎯 नाकाम हो जाती है 📉,
और इसी कारण ये तबके गुलामी 😔⛓️ जैसी हालत में रह जाते हैं।
(13) देश 🇮🇳 का सबसे बड़ा तबका हिन्दू OBC समाज 👥 है, इसलिए उसे देश की बागडोर 🏛️ संभालनी चाहिए 👍,
मगर वह मनुवाद 📜 और पूंजीवाद 💰 का खिलौना 🧸 बन चुका है 😔।
उसके बाद बड़ा तबका दलित समाज 🤝 है, मगर वह भी सियासी तौर पर बिखरा हुआ ❌ है।
और उसके बाद बड़ा तबका मुसलमान ☪️ हैं, जो छोटी-छोटी सियासी पार्टियों 🏛️ में और अलग-अलग मसलकों 📚 में बंटा हुआ है ❌।
(14) मुसलमानों ☪️ को कभी बांग्लादेशी 🇧🇩 के नाम पर, कभी पाकिस्तानी 🇵🇰 के नाम पर,
कभी आतंकवाद 💣 के नाम पर, कभी दंगा-फसाद 🔥 के कारण,
कभी बम ब्लास्ट 💥 के नाम पर, कभी फ़र्ज़ी तंजीमों 🕸️ के नाम पर,
और कभी मुस्लिम बच्चों 👶 को बेवजह तरीके से गिरफ्तार 🚔 करके —
कई तरह से डराने 😨, दबाने ⚠️ और उत्तेजित करने 😡 का काम किया जा रहा है।
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(15) अक्सर लोग 👥 सभी लीडरों 👤 पर किसी ना किसी का एजेंट 🕵️♂️ होने का इलज़ाम ⚠️ लगाते रहते हैं,
मगर हमारा कहना 💬 है कि मुसलमानों ☪️ के पास जो सियासी लीडर 👤 मौजूद हैं, उन्हें दुरुस्त 🔧 करते हुए ही काम लेना पड़ेगा 👍,
और इसी लीडरशिप 👥 से काम लेते हुए नई पीढ़ी 👶📚 की भी लीडरशिप तैयार 🏗️ करनी होगी, ताकि आगे का रास्ता मजबूत 💪 बन सके।
(16) दंगा-फसाद 🔥 हो, फेक एनकाउंटर ⚠️ हो, बेक़सूर नवजवानों 👦 की गिरफ़्तारी 🚔 हो,
मस्जिद 🕌 या मदरसा 📚 का मामला हो, क़ुरान 📖 की तौहीन हो,
नबी ﷺ ☪️ का कार्टून 🖼️ हो, या बजरंग दल ⚠️ और विश्व हिन्दू परिषद ⚠️ की बदकलामी 😡 हो,
हमारे नेता 👤 अक्सर अकेले-अकेले आवाज़ 📣 उठाते रहे हैं,
मगर इसका नतीजा सिर्फ अख़बार 📰 में छपने और TV 📺 पर दिखने तक ही सीमित रह जाता है ❌।
अगर आप लोग मिलकर 🤝 एक साथ आवाज़ उठायें 📣, तो बहुत बेहतर नतीजा 📈 निकल सकता है 👍।
(17) देश 🇮🇳 भर में करीब 1 दर्जन मुस्लिम नेता 👥 हैं,
जिन्हें अगर सियासी तौर पर एकजुट 🤝 कर दिया जाए, तो पूरी क़ौम ☪️ एकजुट हो सकती है 💪,
और उसके बाद मुसलमानों के सारे मसले 📊 हल होने शुरू हो जाएंगे 📈।
(18) देश 🇮🇳 का मुसलमान ☪️ दिल ❤️ से इत्तेहाद 🤝 चाहता है,
मगर देखना 👀 यह है कि कौन इस आवाज़ 📣 को सुन रहा है 👂, महसूस कर रहा है 💭,
और इस नेक मकसद 🤲 के लिए कौन मुस्लिम लीडर 👤 आगे बढ़कर जिम्मेदारी ले रहा है 🚶♂️।
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(19) ऐसी सूरत में मोरारजी देसाई 👤, विश्वनाथ प्रताप सिंह 👤, एच. डी. देवेगौड़ा 👤, चंद्रशेखर 👤, इंदर कुमार गुजराल 👤 की तरह
इस मोर्चे 🏴 का प्रधानमंत्री 🏛️ बनने के रास्ते 🚪 निकल सकते हैं 🚀।
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👍 lake
ReplyDeleteदेखिए समझ में और किस्मत में पवार दीगर ने बेहतरी लिखी है और कोम जागरुक है तो सफलतास ज़रूर मिलेगी
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