अरुण ठाकुर साहब इस्माईल बाटलीवाला कि नज़र में।
.……………………………………..... यह तस्वीर 29 जनवरी 2023 को उनके घर कि है। मैं इस्माईल बाटलीवाला अरुण ठाकुर साहब को जो समझा वह इस शेर के माध्यम से बयान कर रहा हूँ। …………………………………………………………………. हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है। बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।। …………………………………………………………………. कितने लोग और किसने - किसने अरुण ठाकुर को और इस्माईल बाटलीवाला को पहचाना है वह मुझे नहीं मालूम है मगर हम ने अरुण ठाकुर को पहचाना और अरुण ठाकुर ने मुझे पहचाने थे और हम दोनों ने एक दूसरे को सही में पहचाने थे , क्यों की अरुण ठाकुर और हम किसी से कुछ लेने कि कभी कोई तमन्ना नहीं रखते थे बल्कि हम दोनों लोग समाज को कुछ ना कुछ देने कि ही तमन्ना रखते थे। हमारी और अरुण ठाकुर की सोच और समझ , समय के बहते प्रवाह में बहने वाला नहीं था बल्कि समाज को समय के बहते प्रवाह से बाहर निकाल कर उनको उनकी हितकारी और सही दिशा दिखाना रहा है। हम फ़ार...