अरुण ठाकुर साहब इस्माईल बाटलीवाला कि नज़र में।
यह तस्वीर 29 जनवरी 2023 को उनके घर कि है।
मैं इस्माईल बाटलीवाला अरुण ठाकुर साहब को जो समझा वह इस शेर के माध्यम से बयान कर रहा हूँ।
………………………………………………………………….
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है।
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।।
………………………………………………………………….
कितने लोग और किसने-किसने अरुण ठाकुर को और इस्माईल बाटलीवाला को पहचाना है वह मुझे नहीं मालूम है मगर हम ने अरुण ठाकुर को पहचाना और अरुण ठाकुर ने मुझे पहचाने थे और हम दोनों ने एक दूसरे को सही में पहचाने थे, क्यों की अरुण ठाकुर और हम किसी से कुछ लेने कि कभी कोई तमन्ना नहीं रखते थे बल्कि हम दोनों लोग समाज को कुछ ना कुछ देने कि ही तमन्ना रखते थे। हमारी और अरुण ठाकुर की सोच और समझ, समय के बहते प्रवाह में बहने वाला नहीं था बल्कि समाज को समय के बहते प्रवाह से बाहर निकाल कर उनको उनकी हितकारी और सही दिशा दिखाना रहा है।
हम फ़ार्मास्यूटिकल कंपनियों को कांच की बोतल के सप्लायर थे। मगर कांच की बोतल का चलन ख़त्म हो रहा था और आगे चलकर हमारे बच्चों के लिए इसमें ज्यादा अवसर नहीं था क्योँ कि व्यापार करने का हुनर तो हम को था इसलिए हम ने अपने बच्चों को गारमेंट्स लाइन का कोर्स करवाया और बच्चों को गारमेंट्स का कारखाना खुलवाया मगर नए ज़माने की नई तकनीक के इस्तेमाल का हुनर हमको नहीं था और हमारे बच्चे तो व्यापार में बिलकुल कोरे थे मगर मैं अपने बच्चों को नई तकनीक के साथ व्यापार में डालना चाहता था तो हम ने अरुण ठाकुर के सामने अपनी टूटी फूटी मंशा रखी तो अरुण ठाकुर हमारी सोच को बहुत गहराई से समझते थे इसलिए वह हमारी मंशा को समझ गए और उन्होंने 2006 में हमरे बच्चों की गारमेंट्स कंपनी के लिए नई तकनीक वाली बिज़नेस प्रोग्रामिंग कर के दिए थे और इस बिज़नेस प्रोग्रामिंग को किसी दूसरे से करवाते तो हम को बहुत पैसे खर्च करने पड़ते थे।
अरुण ठाकुर साहब कि दूर कि गहरी सोच को सलाम करता हूँ क्यों कि अरुण ठाकुर कि भतीजी जीविता कोठेकर थी जो गांव में पली बढ़ी थी मगर उसको व्यापार करने की लगन थी और गांव में कपड़ों की सिलाई करके कुछ व्यापार किया करती थी मगर जीविता के परिवार किसान और नौकरी पेशा थे इसलिए जीविता को अपने परिवार से व्यापार करने का अनुभव और जानकारी नहीं मिल रही थी और दूसरी तरफ हमारे बच्चे गारमेंट्स के व्यापार में आगे बढ़ने लगे थे, तो जीविता कोठेकर के लगन को देख कर अरुण ठाकुर साहब ने हमारे कारखाने के करीब जीविता को भी कारखाना खोलवा दिए वह इसलिए कि हमारे बच्चों के पास रहकर उसका भी कारखाना चल पड़ेगा। जीविता कोठेकर को हमने मेहनत करते और उसके लगन को देखा है बहुत मेहनती थी मगर इसी दौरान उसकी शादी होगई इसलिए उसको कारखाना बंद करना पड़ा और अगर उसके ससुराल वाले उसके साथ डट कर खड़े होजाते तो आज उसका भी ब्रांड होता। जीविता जब मिलती है तो हमको अब्बा कहती है और हमारी बीवी को अम्मी कहती है।
अरुण ठाकुर साहब का बुधवार 17 जुलाई 2023 को उपचार के दौरान निधन हुआ था जो की देश कि और भारतीय समाज कि बड़ी हानि में से एक है मगर कुदरत के नियम के सामने हम सब बेबस और मज़बूर थे इसलिए अरुण ठाकुर को हम लोग अपने से जुड़ा होने से रोक नहीं सके और उनसे मैं इतना मोतस्सिर था कि अगर मेरे बस में होता तो अरुण ठाकुर को अपने से जुदा होने नहीं देता बल्कि देश और समाज का काम करवाते रहता मगर अफसोस 'इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन'
अरुण ठाकुर साहब की जीवन शैली बहुत सादी थी उनका खान पान शाकाहारी और मांसा हारी दोनों था मगर उसमे भी सादगी थी,उनका पहनावा शर्ट पेंट था मगर बहुत सादा रहता था,उनकी बोलचाल का अंदाज़ बहुत प्यारा था उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कराहट रहती थी और हर किसी को कुछ न कुछ सीखाने की तड़प उनके चेहरे पर झलकती थी।
अरुण ठाकुर साहब के परिवार में, पत्नी रेखा ठाकुर, बहन लता ठाकुर
बेटी सई ठाकुर, बेटा सौरब ठाकुर।
(1) लता ठाकुर,अरुण ठाकुर की बहन थी मगर उनका दुर्भाग्य यह था कि उनके ससुराल में उनका 'गुज़र-बसर' नहीं होसका था तो फिर वह अरुण ठाकुर और रेखा ठाकुर के साथ ही रह रही थीं। लता, अरुण ठाकुर कि बहन तो थी ही मगर हम ने देखा है कि रेखा ठाकुर भी उनसे अपनी बहन जैसा ही व्यवहार करती थी, मगर लता ठाकुर भी अब इस दुनिया में नहीं हैं 'इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन'।
(2)
रेखा ठाकुर सामाजिक शुभचिंतक,सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतक लीडर हैं और महिला आंदोलन और OBC आंदोलन में महाराष्ट्र कि गौरव हैं।
(3)
बेटी सई ठाकुर बड़ी हैं जो टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशलॉजी में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत है ।
(4) बेटा सौरब ठाकुर छोटा है और विज्ञापन कंपनी में क्रिएटिव डायरेक्टर के पद पर कार्यरत है।
अरुण ठाकुर साहब समाजवादी आंदोलन के कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता थे। शिक्षा के सिद्धांत और तरीकों में विशेषज्ञ और लेखक थे। कलात्मक,साहित्यिक, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अकादमी के सदस्य थे। दर्शन, कला और साहित्य में महारत रखते थे। भारतीय आईटी उद्योग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने IRCTC (भारतीय रेलवे का ऑनलाइन आरक्षण सिस्टम) को बड़ा योगदान दिया था। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की ऑनलाइन ट्रेडिंग सिस्टम) जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया था। भारत के बंदरगाहों की कार्यप्रणाली को आधुनिक और प्रभावी बनाया था। भारत के प्रमुख दृष्टि और नेतृत्व ने कई प्रमुख परियोजनाओं को सफलता पूर्वक अंजाम दिए थे बंदरगाहों और मालवाहन का कम्प्यूटरीकरण और ऑटोमेशन करने का महत्वपूर्ण कार्य भी किये हैं। देशभर के 35 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों को कम्प्यूटरीकृत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रधानमंत्री राजीव गांधी को बंदरगाहों और मालवाहन के कम्प्यूटरीकरण का डेमो भी प्रस्तुत किये थे।
हम और हमारी बीवी और हमारी दो बेटियां 29 जनवरी 2023 को अरुण ठाकुर के घर पर उनसे मुलाकात के लिए गए तो वह बहुत खुश हुए और मुझे लगा की वह हमारे साथ कुछ ज्यादा वक़्त गुज़ारना चाहते हैं इसपर हम ने उनसे कहा की आप हमारे घर पर आएं आकर कुछ दिन रहें और वहीँ रहकर हम लोग अपनी पुरानी यादें यद् करके अपना समय गुजारेंगे तो उन्होंने कहा की रेखा से कहो की वह हम को लेकर चले मगर हमारी और अरुण ठाकुर कि यह खवाहिश पूरी नहीं हो सकी जो मैं भुला नहीं सकता हूँ।
ये चमन यूँही रहेगा और हज़ारों बुलबुलें।
अपनी अपनी बोलियाँ सब बोल कर उड़ जाएँगे।।
इस्माईल बाटलीवाला
Comments
Post a Comment