ईद-उल-फितर का दिन कोई जश्न मनाने का दिन नही है।

ईद-उल-फितर का दिन कोई जश्न मनाने का दिन नही है,और उस दिन किसी तरह का जश्न नहीं मनाया जाता है।बल्कि एक मिशन के कामयाब होने के बाद शुकराना अदा करने का दिन है।

रमजान बुराइयों को छोड़ने के ट्रेनिंग का महीना है और रोजादार बुराइयों को छोड़ने का ट्रेनिंग लेता है और 30 दिन की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उसे फितरी खुशी हासिल होती है।और इस दिन साफ सूफ लिबास में वह दो रकात शुकराना अदा करने ईदगाह जाता है।

गरीबी और मिस्किनी भी एक सामाजिक बुराई है और इस बुराई के खात्मा के लिए एक फंड का प्रबंध किया गया है जिसका नाम है फितरा जो परिवार के सभी सदस्य पर लागू है।

अपनी फितरी खुशी में यतीम मिसकीन,निर्धन,ग़रीब,मुहता,लाचार,माजूर और परेशान हाल को शामिल करना ही ईद-उल-फितर का मकसद है।

जो लोग ईद-उल-फितर के दिन काली पट्टी लगा कर समझते हैं की वह लचारों और मजबुरों की हिमायत में हैं,वह लोग नासमझी कर रहे हैं और ईद-उल-फितर के मकसद की दिशा बदल रहे हैं।

इस्माईल बाटलीवाला

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