ईद मिलन का संदेश।

ईद के दिन का मिलन और ईद मिलन समारोह करने वालों को संदेश।
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ईद मिलन का प्रोग्राम इश्लाहे मुआशरा से ताल्लुक रखता है इसलिए ईद मिलन करते वक़्त मुआसरे के मेल मिलाप को ध्यान में रखना चाहिए और किसी तरह के भेद भाव से दूर रखना चाहिए।

ईदुल फितर का मफहूम होता है की अपनी खुशी में सबको शामिल करना मगर हम लोग सबको शामिल नहीं कर सकते हैं तो अपने पड़ोसियों को शामिल कर सकते हैं,और अपने घर से चारो तरफ के चालीस चालीस घर पडोसी होते हैं,और इन सभी परिवारों को शामिल करना सब के लिए मुश्किल है मगर जो लोग इन सभी परिवारों को शामिल कर सकते हैं उनको यह करना चाहिए।  

ईद मिलन के असल हकदार पड़ोसी होता है और गरीब,यतीम, मिस्कीन होता है चाहे वह किसी भी बिरादरी से या किसी भी धर्म से ताल्लुक रखता हो,और वह सामाजिक गुनहगार भी हो सकता हो,आप का विरोधी भी हो सकता है।अगर पडोसी और गरीब, यतीम, मिस्कीन के परिवार शामिल नहीं किये जाते हैं तो ईद मिलन का मकसद नाकाम हो जाता है और इसका जो सवाब मिलना चाहिए वह नहीं मिल पता है।

जो लोग अपने सिर्फ चार पड़ोसी के परिवारों को भी अपनी खुशी में शामिल करें तो भी बेहतर होगा,और जिन लोग को  इन चार परिवारों को भी अपने घर पर बुलाना मुश्किल हो तो पड़ोसियों के घर पर सेवइयां भेजना चाहिए,और जो लोग इनको सेवैंया भेजने की भी ताकत नहीं रखते हैं वह लोग अपने पड़ोसियों के घर जाकर ईद मिलना चाहिए।

आप के घर के करीब जो लोग ठेला लगा कर आप के लिए फल सब्जी और आप के ज़रूरत का सामन आप को मोहय्या कराते हैं वह लोग भी आप के ईद मिलन के हक़दार हैं ,जो लोग आप के घर की सफाई करते हैं और आप के घर के बिगड़े हुए सामान को दुरुस्त करते हैं वह लोग भी आप के ईद मिलन के हक़दार है।

हम ने बहुत सी ईद मिलन के बड़े बड़े प्रोग्राम को देखा है जिसमे अपनी पसंद की पोलिटिकल पार्टी के बड़े बड़े लीडरों को और समाज में अच्छा रुतबा रखने वालों को दावत दिया जाता है मगर वह ईद मिलन ना होकर एक राजनीतिक प्रोग्राम हो कर रह जाता है और ईद मिलन से मुआशरे में जो नजदीकियां होनी चाहिए वह नहीं होती है बल्कि बहुत लोग से दूरियां बढ़ा देती है।

अगर आप ईद मिलन का समारोह करना चाहते हो तो आप की पहले पड़ोसी को दावत देना चाहिए,हो सकता है की कुछ लोग से आप के रिश्ते में कड़वाहट हो फिर भी उनको ईद मिलन के प्रोग्राम की दावत देना चाहिए,जो आप के घर के चारो तरफ चालीस चालीस घर आप का पड़ोसी होता है इनमे अमीर, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार हो सकते हैं जो किसी भी बिरदारी के लोग हो सकते हैं और किसी भी मज़हब के लोग हो सकते हैं,उसके बाद दूर के रिश्तेदारों को दावत देना चाहिए,उसके बाद किसी दूसरे को दावत देना चाहिए चाहे वह लीडर हों।  

इस्माईल बाटलीवाला

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